सभी शास्त्र बताते हैं कि मनुष्य जन्म बहुत पुण्य करने पर ,बहुत अच्छे कर्मों के उपरांत ही मिलता है –तो बार बार जन्म या पुनर्जन्म का प्रश्न ही कहाँ उठता है? फिर कहते हैं-आत्मा अजर -अमर है, वह सिर्फ चोला बदलती है। तो फिर इस दुनिया कि आबादी तो समान रहनी चाहिए। जितने मनुष्य मरते हैं,उससे ज्यादा क्यों पैदा हो रहे हैं, इतनी आत्माए कहाँ से आ रही हैं(परलोक/ब्रह्मलोक) या फिर जहां से भी आ रही है वहाँ कितनी आत्माए हैं और कब तक आती रहेगी ? शास्त्रों की भी मान ली जाय कि 33 करोड़ दिव्य आत्माए सतयुग के समय थी,तो उससे ज्यादा क्यों और कैसे हो गई?